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मछली पालन की जानकारी दे ।

by admin — 2014-12-09 10:54

मछली पालन के लिए कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखे जैसे की तालाब की भली प्रकार से खेती, समय समय पर खादों की पूर्ती, मछली बीजों की व्यवस्था, समय समय पर खर पतवारों और कीड़ों की रोकथाम, मछलियों की फसल कटाई और मंडी में इनका उत्पाद करना । १ किलोग्राम मछली पालन के लिए आपको १ क्यूबिक लीटर पानी ३ मछलियों के बीज, १ किलोग्राम खाद और १०० ग्राम अकार्बनिक खाद चाहिए । इसके अलावा १ किलोग्राम मछली का भोजन और १ साल का समय जरूरी होता है। आप मछली पालन के लिए उन तालाबों और पोखरों को इस्तेमाल कर सकते है जिसमे पशु पानी पीने जाते हो, क्योंकि पशु यहाँ पर अपना गोबर और मूत्र विसर्जित करते है जिससे तालाब के पानी में अकार्बनिक खाद की कमी को दूर करता है। यह खाद पानी में हरे शैवालों को बढ़ाने में मदद करता है जिन्हे मछलियां अपने भोजन के रूप में लेती है । यह तालाब मछली पालने के लिए बहुत ही अच्छे रहते है । पर इस बात का ध्यान रखे की इस पानी में कुछ और मिलाकर इसे दूषित ना करें । प्रति हेक्टेयर मछली पालन के लिए आपको लगभग २००० मछली बीजों की जरूरत पड़ेगी । इसके अलावा २५० किग्रा लाइम या बुझा चूना , १०० क्विंटल कार्बनिक खाद जैसे की मुर्गी, बतख के बाड़ों की सड़ी गली खाद, २५० किग्रा यूरिया और ५०० किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट की जरूरत पड़ेगी । प्रत्येक जिले के मत्सय विभाग मछली पालन के लिए किसानो को यांत्रिक और आर्थिक सुविधा प्रदान करती है । सरकार भी सामन्य किसानो को २०% तक मछली पालन में लिए गए लोन पर छूट प्रदान करती है । मछलियों के प्रजनन का उत्तम समय मानसून का महीना होता है जबकि झींगा के लिए फरवरी से मार्च का महीना होता है ।

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डेयरी के लिए लोन की जानकारी दे

by admin — 2014-12-09 10:53

यह योजना भारत सर्कार द्वारा जारी की गयी है ओर इस योजना का मुख्या उद्दस्य modern cattle farm बनाना है साथ ही साथ गांव में दुग्ध प्रसंस्करण तथा उद्यमता को बढ़ावा देना है | नाबार्ड को इसके कर्यांवाहन के लिए नोडल अगेंच्य बनया गया है| किसान, SHGs, NGOs, Cooperative scoiety, Comnpany इत्यादि इसके लाभार्थी हो सकते है| एक परिवार के एक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं बशर्ते वो अपनी अलग unit ऐसे स्थपित करें की इनके बीच की दूरी ५०० म से अधिक हो| इस योजना के तहत इच्छुक किसान १०% अपना योगदान देना होता है जबकि सर्कार की तरफ से general category के किसानो के लिए २५% अनुदानओर sc/St varg के किसानो के लिए ३३% का अनुदान बैंक लोनचुकाने के लिए मिलता है राशि का न्यूनतम ४०% भाग आप बैंक से लोन ले सकते हैं| अधिक जानकारी के लिए आप नाबार्ड देहरदून के ऑफिस Hotel Sunrise Building 113/2, Rajpur Road Dehradun - 248 001, Uttarakhand में संपर्क कर सकते हैं| इनका फोन नम्बर ०1352748611 , 01352740230 , 01352740231

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कृषि से सम्बंधित लोन की जानकारी दें

by admin — 2014-12-09 10:52

एग्रीकल्चर टर्म लोन उत्तराखंड ग्रामीण बैंक द्वारा फल फूल सब्जी की खेती, फसल लगाने, खेत के लिए मशीनो कि खरीद के लिए दी जाती है। इसके अलावा यह लोन दुग्ध पालन, पशुपालन, बकरी पालन, सुअर पालन, भेड़ पालन के लिए दी जाती है। इसके लिए लोन लेने वाले व्यक्ति के पास कम से कम २ दुधारू पशु होने चाहिए, ५००० रूपए तक की लोन पर कोई फीस बैंक को नहीं देनी पड़ती है, यह लोन ५ वर्ष तक में कभी चुकाया जा सकता आई। यह लोन उन किसानो के लिए बहुत उपयोगी है जो अपना लघु व्यवसाय शुरू करना चाहते है ।

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एलोवेरा बोने की जानकारी दे

by admin — 2014-12-09 10:51

एलोवेरा की फसल को सभी प्रकार की मिट्टियों में उगा सकते हैं, लेकिन अधिक जलभराव, अधिक सर्दी और पाला पड़ने वाले क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त नही होते हैं, एलोवेरा लगाने से पहले आप अपने खेत की अच्छी तरह से जुताई करके उसमे 25 टन गोबर की खाद, 3 किलोग्राम नाइट्रोजन और 3 किलोग्राम फॉस्फेट की मात्रा को आपस में अच्छे से मिलाकर खेत में प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें, एलोवेरा की बीजाई सकर्स अथवा प्रकंदों से की जाती है, प्रकंदों के टुकडों की आपस की दूरी 60 सेंटीमीटर और लाइनों के बीच की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें, प्रकन्द लगभग 10-15 सेंटीमीटर लम्बे होने चाहिए, प्रकंदों को लगाने का समय फरवरी से मार्च महीने तक होता है, एलोवेरा की खेती के लिए वर्ष में 4-5 सिचाईयों की आवश्यकता होती है, एलोवेरा लगाने के 8 महीने बाद आप पौधे की पत्तियों को काट लें, तने का जो भाग भूमि में रह जाता है उससे नये कल्ले निकल आते हैं, इस प्रकार आप एलोवेरा की फसल को 10 वर्ष तक ले सकते हैं ।

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टमाटर के पेड़ सूख जाते है

by admin — 2014-12-09 10:50

टमाटर के पौधे सूख रहे है जिसका सम्भावित कारण फफून्दी जनित रोग है के निदान के लिये कुछ बातो का ध्यान रखे 1. नर्सरी मे बोने से पूर्व प्रति किग्रा बीज को थीरम नामक दवा की 3 ग्राम मात्रा से उपचारित करे ,2. खड़ी फसल मे रोग नियंत्रण के लिये 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से जिंक मगनीज कार्बामेट या जिनेब का छिड़्काव करें 3. फसल चक्र अपनाये, 4. टमाटर की फसल के आठ लाइन के बाद एक लाइन गेंन्दे की फसल की लगाये |

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गाय के चिंचडी हो रही है

by admin — 2014-12-09 10:49

पशु के शरीर में किलनी की समस्या चिन्चीरियों से होती है जो पशु घरों में छिपी होती है, इनसे पशुओं में thailiriosis नाम की बीमारी हो जाती है जिसके कारण पशु को तेज बुखार आता है , भूख कम लगती है, आँख, नाक से पानी बहता है , पशु सुस्त हो जाता है और चमड़ी पर गाँठ सी बनने लगती है, दुधारू पशु का दूध कम हो जाता है, इस बीमारी से बचाव का टीका भी विकसित किया गया है | चिन्चीरियों का प्रकोप होने पर तुरंत ही पशुओं को निकट के पशु चिकित्सालय में ले जाकर दिखाएं, पशु घर में साफ़ सफाई रखे |

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