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मूली की उन्नतशील प्रजातियां की जानकारी दे ? by admin — last modified 2014-11-19 10:38
मूली की अच्छी उपज के लिए उन्नतशील प्रजातियां जैसे- पूसा चेतकी, पूसा देसी, पूसा रेशमी, पूसा हिमानी, जापानीज व्हाइट, पंजाब सफेद, कल्यानपुर-1, सी.ओ -1, अर्का निशांत, चाइनिज पिंक, एच. आर-1, काशी स्वेता, कशा हंस, चाईनीज पिंक, रेड टेल रेडिश, हिसार मूली नं.1 और गणेश सेंथेटीक आदि लगाएं |
सेब की उन्नत किस्मों की जानकारी दे ? by admin — last modified 2014-11-19 10:37
सेब की उत्तराखंड में पायी जाने वाली उन्नत किस्मे है मक्लैंटोश, अमेरिकन जिंजर गोल्ड, किनौरी सेब, रेड डिलिशियस, गोल्डन डिलिशियस, वॉरेस्टर परमैन, स्टॉकिंग डिलिशियस, रिचर्ड, जेम्स ग्रीव, जोनाथन, रोम ब्यूटी, अर्ली शांबरी, गोल्डन पीपीन, किंग ऑफ़ पीपीन, विंटर बनाना, रेड चीफ, ऑरेगैनो स्पर -II, सिल्वर स्पर, रेड स्पर, वेल स्पर, स्काई लाइन सुप्रीम, स्कारलेट गाला और रेड फुजी |
मेरे अमरुद के पेड़ में फल छोटे आ रहे है कोई उपाय बताएं जिससे की अमरुद के फल अच्छे आने लगे| by admin — last modified 2014-11-19 10:36
किसान भाई , अमरुद के पेड़ों में फलों के छोटे आने का एक कारन खाद एवं उर्वरक की अपर्याप्त मात्रा का होना भी है| अतः गोबर की खाद की मात्रा- ७३० ग्राम, नाइट्रोजन १८० ग्राम , ६८० ग्राम पोटाश प्रति वर्ष पेड़ों में डालें और 2-४ डी का 2 ग्राम /लीटर का छिडकाव करें|
गाजर पर सफेद रतुआ रोग का प्रकोप हो रहा है ? by admin — last modified 2014-11-19 10:35
इस रोग में पौधे के पत्तों, तनों तथा फूल वाली टहनियों पर विभिन्न आकार के बिखरे हुए ध्ब्बे पाये जाते हैं, जो बाद में बड़े आकार में फैल जाते हैं, जिससे पूरी फसल खराब होने लगती है, इस रोग की रोकथाम के लिए बुवाई से पहले प्रति किलो बीज को बैविस्टीन नामक दवा की 3 ग्राम की मात्रा से उपचारित कर बोयें, बुवाई के लिए स्वस्थ पौधे से ही बीज लें, इसके अलावा फसल पर ब्लाईटौक्स 50 की 300 ग्राम की मात्रा को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |
मेरी लौकी की फसल में लौकी में सडन की समस्या है | by admin — last modified 2014-11-19 10:34
किसान भाई, लौकी की फसल में यह फल मक्‍खी का आक्रमण है। इसके मैगेट छोटे फलों में अधिक नुकसान करते हैं। इसके मैगेट का सीधे नियंत्रण सम्‍भव नही है। परन्‍तु वयस्‍क मक्खियों को नियंत्रित करके प्रकोप को कम किया जा सकता है। इसके नियंत्रण के लिए आप खेत में रात के समय प्रकाश के ट्रैप (light traps) लगायें तथा उनके नीचे किसी बर्तन में चिपकने वाला पदार्थ जैसे सीरा अथवा गुड का घोल भर कर रखे। 2-3 दिन बाद घोल को बदलते रहें।नर वयस्‍कों को फेरामोन के ट्रेप लगाकर भी नियंत्रित कर सकते। इसके अलावा जब फल मक्खी फसल पर नजर आए तभी उन्हें आकर्षित करने के लिए 50 ग्राम गुड़ या चीनी और 10 मि. ली. मैलाथियान 50 ई. सी. को 5 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करने से भी फलमक्‍खी की संख्‍या में कुछ कमी की जा सकती है।
धान में खैरा रोग की रोकथाम कैसे करें ? by admin — last modified 2014-11-19 10:34
खैरा रोग जिंक की कमी से होने वाला रोग है इसकी रोकथाम के लिए बीजो को बोने से पहले ०.४% जिंक सल्फेट के घोल में रातभर १२ घंटो तक भिगोकर बीजोपचार करने के बाद ही बोयें | फूल आने पर ०.५% जिंक सल्फेट और ०.२५% बुझे चूने के घोल या ०.३% जिंक सल्फेट और २% यूरिया के मिश्रित घोल का दो बार फसल पर छिडकाव करें अथवा आप २ किलोग्राम जिंक सल्फेट और १ किलोग्राम बुझे चूने को ४ लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर दो बार फसल पर छिडकाव कर सकते है |