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LifeLines Education - Sample FAQs

by bhairab last modified 2012-09-25 12:44
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Hindi


सवाल: कक्षा-१ व कक्षा-२ के बच्चों को प्रभावी तरीके से कैसे पढ़ायें ? प्राथमिक स्तर के बच्चो को हिन्दी भाषा में मात्राओ का सही ज्ञान कैसे कराया जाये ?

जवाब: पहली कक्षा में हिन्दी पढ़ाने के लिए बच्चों को स्वर व व्यंजन सिखाया जाना जरुरी है जैसे प्रायमर की आकृतियों की सहायता से, चार्ट, चित्र और मॉडल की सहायता से, छोटे-छोटे वाक्यों को मात्राओं के साथ लिख कर,  स्वयं स्वर व व्यंजन की ध्वनियों का उच्चारण करते हुए एवं उनका सस्वर वाचन करते हुए तथा छात्रों को कविताओं व बाल गीतों के माध्यम से अक्षर बोध व शब्द बोध आदि द्वारा सिखाया जा सकता है। प्राथमिक स्तर के बालको को हिन्दी में मात्राओ को सिखाने के लिए सबसे पहले उन्हें मात्राओं को ब्लेकबोर्ड पर लिख कर छोटी व बडी मात्राओ जैसे- अ,आ,इ,ई का भेद कराना चाहिए। उन्हें बोल कर बताना चाहियें की किस मात्रा से कौन सी ध्वनि निकलती है जैसे-किताब को बोलने में 'कि' पर कम और जीवन को बोलने में 'जी' पर थोडा ज्यादा जोर पडता है। इसी तरह के कई अक्षरों एवं मात्राओं से बने वाक्यों को बच्चों को करके लाने के लिए कहना चाहिए ताकि वे स्वयं मात्राओं को समझ सके। एक चार्ट पर सभी मात्राओं के चार-पाँच उदहारण लिखकर रोज कक्षा में उन्हें बच्चों से दोहराए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग करके बताना चाहिए ।

सवाल: पहली तथा  दूसरी कक्षा के बच्चों की लिखने की गति कितनी होनी चाहियें और उनकी लेखन की गति कैसे बढ़ाए ?

जवाब: पहली तथा दूसरी कक्षा के बच्चों की लेखन की गति बढ़ाने के लिए आप उन्हें श्रुति लेख लिखायें। इस वर्ग के बच्चों से एक मिनट में 5-10 शब्द लिखने के लिए और तीसरी चौथी कक्षा के बालकों से एक मिनट में 10 से अधिक शब्द लिखने के लिए कहें |

कक्षा ६ के विद्यार्थियों को सामान्य वाक्यों में मुहावरों का प्रयोग कर एवं उसी के समानार्थ मुहावरों का उदाहरण दे कर सरलतापूर्वक समझा सकते है ।


Sanskrit


सवाल: संस्कृत श्लोकों का हिन्दी में सरलतम तरीके से अनुवाद कैसे किया जा सकता है ?

जवाब: सर्वप्रथम श्लोक के बड़े शब्दों का सन्धि विच्छेद करवाए तथा सामासिक शब्दों का समास विग्रह करवाए । तत्त्पश्चात् श्लोक का अन्वय करवाए, शब्दार्थ ज्ञात करवा के फिर श्लोक का अनुवाद करवाए ।विद्यार्थियों को इस प्रकिया का निरंतर अभ्यास करवाइए जिससे बच्चे स्वंय अनुवाद करना सीख जायेंगे |


सवाल: बच्चों को धातु रुप सिखाने के लिए किस विधा का प्रयोग किया जाना चाहिए ?

जवाब: संस्कृत में बच्चों को धातु रुप सिखाने की सरलतम विधा यह है कि सबसे पहले हम बच्चों को तिङ् प्रत्यय सिखाएंगे जो सभी लकारों में लगाए जाते है | उदाहरणतया- लट् लकार में अति, अतः, अन्ति । असि, अथः, अथ । आमि, आव, आमः और साथ ही तीनों पुरुषों में जो धातु रुपों में समानताएं रहती है, उसके बारें में विद्यार्थियों को बता देना चाहिए । जिससे विद्यार्थियों को संस्कृत में धातु रुप याद करने मे आसानी होगी ।


Curriculum


सवाल: उच्च प्राथमिक स्तर पर Playing Cards का उपयोग किस प्रकार से कर सकते है ?

जवाब: उच्च प्राथमिक स्तर पर Playing Cards का उपयोग चित्रों के माध्यम से तथा अंको के माध्यम से विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भाषा एवं गणित विषय को पदाने के लिए कर  सकते है| गतिविधि आधारित शिक्षण में Playing Cards का उपयोग किया जा सकता है । रासायनिक विज्ञान के रसायनिक तत्व जैसे पाठ पढ़ाने में Playing Cards का उपयोग कर सकते है| इसके लिये कला शिक्षा से अधिकतम जानकारी ली जा सकती है ।

सवाल: यदि विद्यालय में चार्ट, मॉडल आदि शिक्षण सामग्री उपलब्ध नहीं हैं, तो कक्षा-१ व कक्षा-२ के विद्यार्थियों को कैसे पढ़ायें जिससे उन्हें अच्छी तरह से समझ में आ जाए ?

जवाब: कक्षा-१ व कक्षा-२ के बच्चों को Playing by Doing विधि से पढ़ाया जाना चाहिए| इस विधि में विभिन्न प्रकार की  शिक्षण विधियों का प्रयोग करके जैसे – कहानी के माध्यम से उच्चारण व सुनने की क्षमता विकसित करना, नाटकीय प्रकरण के द्वारा विभिन्न उच्चारण व व्यक्त करवाना सिखाना, पहेली आदि के द्वारा बच्चों की एकाग्रता को बढ़ाया जा सकता है । इसके अतिरिक्त हम विद्यार्थियों को ग्रुप सिस्टम द्वारा अध्ययन करा सकते है । हम उनके साथ समूह  में बैठकर कहानी, कविता आदि के द्वारा विषय को सरल बना सकते है ।


सवाल: मानसिक रुप से अक्षम बच्चों को कैसे पढाया जाए ?

जवाब: इस प्रकार के बालकों के लिए - (1)  शिक्षक योजना विधि द्वारा पाठन कार्य सम्पन्न कराए |  (2) रूचि को ध्यान में रखकर शिक्षण कार्य कराना चाहिए | (3) शिक्षक प्रयोगात्मक कार्यों में इस प्रकार के बालकों को लगाए | (4) व्यक्तिगत रूप से ध्यान देना चाहिए | (5) इस प्रकार के बालकों के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों तथा विशिष्ट प्रशिक्षित अध्यापकों की व्यवस्था करें | ऐसे बालको के लिए विशिष्ट विद्यालय होते है ।

सवाल: कक्षा - ८ की गतिविधि आधारित मूल्याकंन  के विषय में बताए ।

जवाब: गतिविधि आधारित मूल्यांकन तीन तरह से होता है- (1) लिखित मूल्यांकन जिसमें लिखित परीक्षा , निबन्ध लेखन, पत्र लेखन आदि | (2) मौखिक मूल्यांकन जिसमें मौखिक परीक्षा प्रश्नोत्तरी, अंताक्षरी, वाद-विवाद, आशु-भाषण आदि | (3) विद्यालय की सहशैक्षिक गतिविधियों में विद्यार्थियों का जुड़ाव जैसे- प्रार्थना सभा, खेल- कूद प्रतियोगिता, सांस्कृतिक – साहित्यिक गतिविधियां, स्काउट आदि | इन तीनो के मूल्यांकन के आधार पर बालक के पूर्ण व्यवहार का आंकलन किया जाता है ।


Geography


सवाल: भारत का मानचित्र श्रीलंका के मानचित्र से जुडा हुआ क्यों होता है ?

जवाब: भारत का मानचित्र श्रीलंका के मानचित्र से जुड़ा हुआ होता हैं । इसके कुछ कारण हैं:- (1) श्रीलंका एक टापु हैं जो भारतीय सागर बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और अरब सागर के दक्षिण-पूर्व में स्थित हैं । (2) हिन्दु मान्यता के अनुसार राम का पुल( जिसका निर्माण राम के काल में वानर नल् ने किया था।) अब वो Adam's Bridge के नाम से भी जाना जाता हैं, वह पुल भारत और श्रीलंका को जोडता हैं। (3) Palk Strait की चौडाई बहुत कम होने के कारण श्रीलंका की सीमा भारत के नगर, रामेश्वरम से नहीं दिख पाती इसी वजह से भारत का मानचित्र श्रीलंका के मानचित्र से जुडा हुआ होता हैं ।

सवाल: यूरोप में पोढ़ाजोल मिट्टी ही क्यों हैं, प्रेरिज या चर्नोजम क्यों नहीं ?

जवाब: यूरोप में पोढ़ाजोल मिट्टी के अतिरिक्त अन्य प्रकार की मिट्टी भी पायी जाती है परन्तु वहाँ की वातावरणीय परिस्थिति के अनुसार संभवतः पोढ़ाजोल मिट्टीकी अधिकता है|


सवाल: मानचित्र का ज्ञान कक्षा - ५ के छात्रों को कैसे करवाया जाए ?

जवाब: कक्षा - ५ के छात्रों को मानचित्र का ज्ञान करवाने के लिए सबसे पहले बोर्ड पर हाथ से सामान्य मानचित्र बना कर बताएं । जब छात्रों को इसका अभ्यास हो जायें तब खाली मानचित्र दिए जाए एवं बाजार से टी. एल. एम. के माध्यम से मानचित्र खरीद कर कक्षा में लगाया जाए। जिसको छात्र देखेगा, समझेगा तो मानचित्र का ज्ञान होगा ।

सवाल: कक्षा -8 में सामाजिक विज्ञान विषय में महाद्वीप के पाठ को कैसे समझायेंगे ?

जवाब: कक्षा -8 में सामाजिक विज्ञान विषय में महाद्वीप के पाठ को समझाने का सबसे आसान व सही तरीका नक्शे के माध्यम से है | नक्शे के माध्यम से बालक आसानी से पाठ को समझ पाएगा । नक्शे के अतिरिक्त हम ग्लोब एवं एटलस के माध्यम से भी हम बालकों को महाद्वीप के पाठ को समझा सकते है । यदि विद्यालय में ओवर हेड प्रोजेक्टर उपलब्ध हो तो उसके माध्यम से भी हम बालकों को महाद्वीप के पाठ को समझा सकते है।

Social Studies


सवाल: आदिमानव का जीवन घुमक्कड क्यों था ?

जवाब: आदिकाल में सभ्यता और संसाधन इतने विकसित नहीं हुए थे की व्यक्ति कार्यों में व्यस्त हो जाए । आदिकाल को जंगल राज के नाम से भी जाना जाता है । यही कारण है की आदिकाल में मानव अपने भोजन के लिये घूमता रहता था ।

सवाल: 82 डिग्री 30 ' पूर्वी देशांतर को भारत की मानक याम्योत्तर क्यों माना गया है ?

जवाब: 82 डिग्री 30 ' पूर्वी देशांतर को भारत की मानक याम्योत्तर इसलिए कहां गया है क्योंकि यह रेखा भारत के मध्य से होकर निकलती है । और इसी के आधार से पूरे देश का समय निर्धारित होता है ।


Maths


सवाल: त्रिभुजो की समरुपता को किस विधि से बच्चों को पढाए की वे इसे आसानी से समझ सके ?

जवाब: त्रिभुजो कि समरुपता में दो बाते महत्वपूर्ण होती है : (1) दोनो त्रिभुजो के संगत कोण समान हो | (2) उनकी भुजाएं समानुपाती हो । चाहे उनका आकार व माप असमान हो। त्रिभुजो कि समरुपता के तीन नियम है- (१). AAA का नियम -इस नियम को हम छात्रों को दो त्रिभुजो की आकृतियो को जिनका आकार समान हो को गत्ते पर काट कर डी की सहायता से नाप कर समझा सकते है की इनके संगत कोण आपस मे समान है। अतः यह त्रिभुज आपस मे समरुप है। (२). (२). SSS का नियम - इस नियम के अनुसार जब हम दो समान आकार एवं असमान माप वाली त्रिभुजों को काट कर 'डी' की सहायता से नापते हैं तो इन दोनों त्रिभुजो की भुजाए आपस मे समरुप होती है। (३). SAS का नियम- इस नियम के अनुसार दो त्रिभुज जिनकी दोनो भुजाए समान व उनके बीच का कोण भी बराबर हो एसा त्रिभुज काट कर डी की सहायता से बता सकते है कि ये त्रिभुज आपस मे समरुप है। दो त्रिभुजो के मध्य समरुपता को सिद्ध करने के किए उन दोनो त्रिभुजो के अलग-अलग कोणो को लेकर उनमे समानता के बारें में छात्रों को बता सकते है। इसमे तीनों कोण या भुजाओ को समान होना जरुरी है ये बात बच्चो को बार बार याद करवानी चाहिए ।


सवाल: प्राथमिक स्तर पर गणित विषय में पहाड़े याद करवाने की सरलतम विधि बताईये ?

जवाब: प्राथमिक स्तर पर गणित विषय में पहाड़े याद करवाने की सरलतम विधि के रुप मे हम छात्रों को पहाड़े लिखकर याद करने को कह सकते है एवं निम्न विधि द्वारा जैसे - २ के पहाडे के लिए हम वस्तुओं की सहायता लेकर जैसे २ वस्तुएं एक बार रख कर २ बताया जाये ,२ वस्तुओं को २ बार रखकर ४ बताया जाए, २ वस्तुओं को ३ बार रखकर ६ बताया जाये इसी प्रकार अन्य पहाड़े याद करवाएँ जा सकते है । इसके अतिरिक्त हम चार्ट द्वारा एवं बालको को गणित के खेल खिलाकर पहाड़े याद करवा सकते है ।

सवाल: गणित मे गणित किट का प्रयोग कैसे किया जाता है ?

जवाब: रेखाणित को समझने के लिए गणित किट का प्रयोग किया जाता है। इस किट मे प्रकार, डि, स्केल आदि उपकरण होते है। इनकी सहायता से रेखागणित मे प्रायोगिक कार्य जैसे -कोण बनाना, त्रिभूज बनाना, आयत ,वर्ग आदि ज्यामितीय आकृति को ब्लेकबोर्ड पर बच्चो को आसानी से समझाया जा सकता है।

Biology


सवाल: पादप कोशिकाओं एवं जंतु कोशिकाओं में तुलना कीजिए ?

जवाब: पादप कोशिकाओं तथा जंतु कोशिकाओं में निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं – (1) पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली और कोशिका भित्ति दोनों पाई जाती हैं । जबकि जंतु कोशिका में केवल प्लाज्मा झिल्ली पाई जाती हैं, कोशिका भित्ति नहीं । (2) पादप कोशिका में क्लोरोप्लास्ट उपस्थित होता हैं जबकि जंतु कोशिका में क्लोरोप्लास्ट अनुपस्थित होता हैं । (3) पादप कोशिका में सेंट्रोसोम अनुपस्थित होता हैं । परंतु जंतु कोशिका में सेंट्रोसोम उपस्थित होता हैं । (4) पादप कोशिका में रसधानी बड़ी तथा पूर्ण विकसित होती हैं जबकि जंतु कोशिका में रसधानी छोटी, संख्या में कम एवं अस्थायी हैं । (5) पादप कोशिका में गॉल्जी उपकरण पूर्ण विकसित नहीं होते हैं । परंतु जंतु कोशिका में गॉल्जी उपकरण उपस्थित एवं पूर्ण विकसित होता हैं । (6) पादप कोशिका का आकार निश्चित होता हैं जबकि जंतु कोशिका का आकार विभिन्न प्रकार का होता है ।

सवाल: ग्लाइकोलाईसिस चक्र को पूर्ण होने के लिये क्या वायु की आवश्यकता पडती है ?

जवाब: ग्लाइकोलिसिस आक्सीजन की उपस्थिति व अनुपस्थिति में हो सकता है । आक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाले ग्लाइकोलिसिस को खमीरीकृत (Fermented) कहते हैं । इस प्रोसेज में एक ग्लूकोज अणु से दो ए.टी.पी. ऊर्जा प्राप्त होती है । आक्सीजन की उपस्थिति के अंदर ग्लाइकोलिसिस प्रोसेज जो कमपाउंड बनाता है व आक्सीजन के साथ मिलकर ग्लूकोज को आक्सीडाइज कर देता है । इस प्रोसेज में चौतीस ए.टी.पी. ऊर्जा प्राप्त होती है अत: आक्सीजन की अनुपस्थिति में 2 ए.टी.पी.ऊर्जा व आक्सीजन की उपस्थिति में 34+2=36 ए.टी.पी.ऊर्जा प्राप्त होती है ।

सवाल: खाद्य श्रंखला किसे कहते हैं ? उदाहरण देते हुए प्राकृतिक संतुलन में इसका महत्त्व स्पष्ट कीजिए ।

जवाब: खाद्य श्रंखला - सजीवों में पोषण के लिए परस्पर निर्भरता के कारण बनने वाली श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते है । प्राकृतिक संतुलन में खाद्य श्रृंखला का महत्त्व - हमारे पर्यावरण में इस प्रकार की कई खाद्य श्रृंखलाएँ पाई जाती है जो आपस में जुड़कर खाद्य जाल बनाती है । इसमें किसी एक सदस्य के बिल्कुल लुप्त हो जाने का प्राकृतिक संतुलन पर बुरा प्रभाव पड़ता है । माना कि खाद्य जाल में सर्प विलुप्त हो गये । अब प्रकृति में सर्प के विलुप्त हो जाने से मेंढ़क -चूहों की संख्या अनियंत्रित हो जाएगी, जो न केवल पादपों, फसलों को चट कर जाती है । अतः हर खाद्य श्रृंखला तथा उसके सदस्यों का प्राकृतिक पर्यावरण में महत्वपूर्ण स्थान है । खाद्य जाल हमारे प्राकृतिक संतुलन का मूल आधार है । खाद्य जाल की किसी एक श्रंखला के विलुप्त हो जाने से प्राकृतिक असंतुलन हो जाता है ।

Physics


सवाल: उदाहरण की सहायता से स्पष्ट कीजिए कि ध्वनि का प्रसारण ऊपर, नीचे तथा सभी दिशाओं में होता हैं ?

जवाब: ध्वनि का प्रसार स्त्रोत के ऊपर, नीचे तथा सभी दिशाओं में होता है | इसे हम निम्न उदाहरणों से समझ सकते है - जब विद्यालयों में छुटी की घंटी बजती है, तब अलग अलग दिशाओं में स्थित कक्षाओं के विद्यार्थी उसकी आवाज़ सुनकर बाहर आ जाते हैं | इसी प्रकार जब खुले स्थान पर पटाखा छोड़ा जाता है तो उसके धमाके की आवाज़ न केवल उसके चारों ओर के व्यक्ति सुन लेते हैं अपितु उससे ऊपर तथा निचले भागों में भी उसकी ध्वनि सुनी जा सकती है इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि ध्वनि का प्रसारण स्त्रोत के ऊपर, नीचे तथा सभी दिशाओं में होता है |


सवाल: बच्चों को निर्वात की स्थिति समझाने के लिये क्या करें ?

जवाब: "निर्वात" जो शब्द है वह वात शब्द में निर् उपर्सग लगने से बना है । वात का अर्थ होता है "वायु" इस प्रकार निर्वात का अर्थ होता है जहाँ वायु नहीं हो । ऐसा स्थान जहाँ पदार्थ की ठोस,द्र्व तथा गैस में से कुछ भी नहीं है । पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर एक बहुत बड़ा भाग निर्वात होता है,जहाँ वायु भी नहीं होती है । बच्चों को निर्वात की स्थिति समझाने के लिये आप विभिन्न उदाहरण के माध्यम से पढ़ा सकते हैं जैसे - एक काँच का गिलास लें उसके पश्चात उस गिलास को मुहँ के पास ले जाकर उसकी वायु को मुहँ द्वारा खींच लें हम देखते हैं कि गिलास मुहँ से चिपक जाता है । यह स्थिति गिलास में आंशिक निर्वात के कारण उत्पन्न होती है । इसी तरह बल्ब व वेक्युम पम्प आदि उदाहरण तथा प्रयोग के माध्यम से बच्चों को समझाया जा सकता है क्योंकि करके सीखने से बच्चों को जल्दी याद व समझ में आता है ।

Chemistry


सवाल: प्रयोगशाला में ऑक्सीजन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए ?

जवाब: एक कठोर कांच की परखनली में 2-3 ग्राम पोटेशियम परमेंग्नेट (KMnO4) लेते हैं | परखनली में एक छिद्र वाला कॉर्क लगा देते हैं | परखनली को स्टैंड पर लगाकर कॉर्क के छिद्र में निकास नली इस प्रकार लगाते हैं कि दूसरा सिरा जल से भरी द्रोणिका में रखे हुए मधुकोष मंच में रहे | एक गैस जार जल से भरकर मधुकोष मंच पर उल्टा रख देते हैं | उपकरण को प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की सहायता से वायुरोधी कर लेते हैं | अब पोटेशियम परमेंग्नेट से भरी परखनली को धीरे-धीरे गर्म करते हैं | कुछ समय बाद बनी ऑक्सीजन गैस, जल में बुलबुलों के रूप में होती हुई गैस जार में एकत्र होने लगती हैं तथा जल का तल कम होने लगता हैं | इस प्रकार ऑक्सीजन गैस जल को हटाकर गैसजार में एकत्र होती हैं | इसे जल की हटाव विधि कहते हैं | ऑक्सीजन से भरे गैस जार को मधुकोष मंच से कांच के ढक्कन से ढक कर बाहर निकालते हैं | प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस बनाते समय निम्न सावधानियाँ रखनी चाहिए – (1) उपकरण वायुरोधी होना चाहिए | (2) लैम्प को हटाने से पूर्व निकास नली को द्रोणिका से हटाना चाहिए | (3) परखनली को धीरे-धीरे गर्म करना चाहिए | (4) गैसजार को हटाने के बाद ही लैम्प को हटाना चाहिए |


सवाल: परमाणु सरंचना को छात्रों को किस विधि से पढ़ाए की उन्हें समझ में आ जाए| दैनिक जीवन के व्यवहारिक उदहारण द्वारा समझाएं ?

जवाब: परमाणु किसी तत्व का सबसे छोटा भाग हैं । जिसमें उस तत्व के रासायनिक गुण निहित होते हैं। इसके केन्द्र में नाभिक होता है । नाभिक, धनात्मक आवेश वाले प्रोटॉनों एवं अनावेशित न्युट्रॉनों से बना होता हैं । नाभिक के चारों ओर ऋणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते रहते हैं। जिस तरह पृथ्वी सूर्य के चारों और चक्कर लगाती हैं । जब किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या उसके नाभिक में स्थित प्रोटॉनों की संख्या के समान होती है तब परमाणु अनावेशित होता है अन्यथा परमाणु धनावेशित या ऋणावेशित आयन के रूप में होता हैं । इसको हम बच्चों को बूंदी के लड्डू का उदाहरण देकर समझा सकते है। बूंदी के लड्डू को हम परमाणु व कालीमिर्च को इलेक्ट्रॉन मान सकते है। जिस तरह लड्डू में कालीमिर्ची कहीं भी होती है उसी तरह इलेक्ट्रॉन भी नाभिक के चारों और होते हैं । इसे हम एक रस्सी द्वारा भी समझ सकते हैं । रस्सी पर पत्थर बांध कर उसे हाथ द्वारा चारों तरफ घूमाएंगे । हाथ को हम नाभिक मान सकते हैं और पत्थर को इलेक्ट्रॉन । इससे यह पता लगता है कि इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दूरी पर ही चक्कर लगा सकते हैं । सभी इलेक्ट्रॉन एक समान होते हैं । ये नाभिक के चारों और निश्चित कक्षाओ में चक्कर लगाते हैं । इन कक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा अलग-अलग होती हैं ।

सवाल: आक्सीकरण तथा अपचयन की परिभाषा इलेक्ट्रोनिक अंक के आधार पर समझाइए ?

जवाब: ऑक्सीकरण - वह प्रक्रिया जिसमें किसी परमाणु, आयन अथवा अणु द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रोनों का त्याग किया जाता हैं । ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहलाती है । इस प्रक्रिया में परमाणु/आयन के धनावेश में वृद्धि अथवा ऋणावेश में कमी होती हैं । अपचयन - वह प्रक्रिया जिसमें किसी परमाणु, आयन अथवा अणु द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रोनों को ग्रहण किया जाता हैं । अपचयन अभिक्रिया कहलाती हैं । इस प्रक्रिया में परमाणु/आयन के धनावेश में कमी अथवा ऋणावेश में वृद्धि होती हैं ।

English


Question: State the situations when the English letter "G" is pronounced as 'ग'(g) or hard 'g'sound & when it is pronounced as 'ज' (j) or soft 'g' sound?

Answer: The English alphabet "G" is pronounced as 'ग'(g) or hard 'g'sound in the following cases:- 1 g + Consonant e.g Angle 2 gg + Consonant e.g giggle 3 gg + Vowel e.g druggist 4 g + a e.g Arrogant 5 g + o e.g Diagonal 6 g + u e.g August 7 g + e e.g Anger 8 g + i e.g Finger 9 g (comes at the end of the word) e.g Bag The English alphabet "G" is pronounced as 'ज' (j) or soft 'g' sound in the following cases:- 1 g + e (which comes at the end of the word) e.g Age 2 g + e (Some Exceptions are there) e.g Algebra 3 g + i (Some Exceptions are there) e.g Digit 4 g + y e.g Gym

Question: How can we develop reading skills among weak students ?

Answer: For developing reading skill among weak students we should first develop their listening skill. We can develop it by listening more and more audios from Television, Radio, Cricket commentary or from the subject teacher too. Then they should practice the words and sentences. It will gradually develop their reading skill.


Question: How to teach the alphabet to beginners?

Answer: सबसे पहले उन्हें english alphabets charts के माधयम से पढ़ाए। फिर उन्हें कुछ इस तरह के सवाल पूछे - a) Letter Recognition: join up the upper and lower case letters with the same name: 1) f K n m Q X F N x M k q Recognition of lower case and UPPER CASE letters Letter Recognition - b) read the names of the letters: Aa Bb Cc Dd Ee c)Join the letters with the same sound: example a--H--k 1) B M P t h N H n m b r A R a T p d)Ring the letter which is the same as the first letter in the row: SCORE _____ out of 15 1 b d d b d 2 ghMw ghWw ghmw ghMw ghMW e) Write the small case letters on the line below.

Computer Science


Question: What is an object oriented programming (OOP) language?

Answer: Object-oriented programming (OOP) is a programming paradigm that uses "objects" – data structures consisting of datafields and methods together with their interactions – to design applications and computer programs. Programming techniques may include features such as data abstraction, encapsulation, polymorphism, and inheritance. Many modern programming languages now support OOP. To perform object-oriented programming, one needs an object-oriented programming language (OOPL). Java, C++ and Smalltalk are three of the more popular languages.

Question: NTLDR file miss होने पर computer boot नही होता, इसका क्या कारण है?

Answer: NTLDR is short for NT loader – a program loaded from the hard drive boot sector that displays the Microsoft Windows NT startup menu and helps Microsoft Windows NT load. So when it goes missing for some reason, your windows cannot load.